22 फीट गहरे पानी में उतारे गए राजकुमार की डूबने से मौत, 6.50 लाख मुआवजा और कलेक्टर दर पर नौकरी के आश्वासन के बाद उठा शव।
बलरामपुर…
त्रिकुंडा थाना क्षेत्र के ग्राम नावाडीह स्थित सिंचाई विभाग के जलाशय में लीकेज सुधारने के दौरान 55 वर्षीय राजकुमार मरावी की डूबने से मौत हो गई। परिजनों और ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राजकुमार को बिना लाइफ जैकेट अथवा अन्य सुरक्षा उपकरणों के करीब 22 फीट गहरे पानी में उतारा गया था। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला।
जानकारी के अनुसार त्रिकुंडा जलाशय में करीब एक माह से पानी का रिसाव हो रहा था। इसे ठीक कराने के लिए सिंचाई विभाग के टाइम कीपर अनिल गुप्ता और चौकीदार अहमद अली मौके पर पहुंचे थे। आरोप है कि निरीक्षण के बाद उन्होंने गांव के ही राजकुमार मरावी को काम के लिए बुलाया। परिजनों का कहना है कि राजकुमार की तबीयत खराब थी और उन्होंने जाने से मना भी किया था, लेकिन बार-बार बुलाने के बाद वे जलाशय पहुंचे।
मृतक की बहू देवंती मरावी के मुताबिक, राजकुमार दोपहर में खाना खा रहे थे, तभी उन्हें बांध के काम के लिए बुलाया गया। उन्होंने मना किया, लेकिन दोबारा लोगों को भेजकर उन्हें बुलाया गया। परिजनों का आरोप है कि पहले 500 रुपये, फिर 1000 रुपये और बाद में 5000 रुपये देने की बात कहकर उन्हें काम पर ले जाया गया। आधे घंटे तक नहीं लौटे तो शुरू हुई तलाश
ग्रामीणों के अनुसार राजकुमार को बिना सुरक्षा उपकरण के गहरे पानी में उतारा गया। करीब आधे घंटे तक उनके बाहर नहीं आने पर तलाश शुरू की गई। इस दौरान एक 15 वर्षीय बच्चे की कमर में रस्सी बांधकर उसे भी पानी में उतारने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। हालांकि बच्चा सुरक्षित बाहर निकल आया।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। तलाश के दौरान राजकुमार का शव पत्थर और वॉटर आउटलेट होल के बीच फंसा मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारी मौके से चले गए, जिससे लोगों में आक्रोश और बढ़ गया।
*मुआवजे और नौकरी के आश्वासन के बाद उठा शव*
शव मिलने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने मौके पर ही प्रदर्शन करते हुए शव उठाने से इनकार कर दिया। उनकी मांग थी कि परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए और घटना के लिए जिम्मेदार जल संसाधन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच लंबी बातचीत के बाद दोपहर करीब 3:30 बजे मुआवजे और नौकरी के संबंध में सहमति बनी। मृतक के परिवार को 6 लाख 50 हजार रुपये मुआवजा देने तथा परिवार के एक सदस्य को कलेक्टर दर पर नौकरी देने का आश्वासन दिया गया। इसके बाद परिजन शव उठाने के लिए तैयार हुए।
*पूर्व विधायक ने की एफआईआर की मांग*
पूर्व विधायक बृहस्पति सिंह और कांग्रेस नेता संतोष यादव ने घटना को गंभीर लापरवाही बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि बिना सुरक्षा इंतजाम के किसी व्यक्ति को 22 फीट गहरे पानी में उतारना गंभीर मामला है। मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ अपराध दर्ज करने और मृतक के परिवार को न्याय दिलाने की मांग की गई है। ग्रामीणों ने भी टाइम कीपर अनिल गुप्ता, चौकीदार अहमद अली सहित घटना के लिए जिम्मेदार अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।