राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग, कांग्रेस ने राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन।
निष्पक्ष जांच की मांग, भाजपा कार्यकर्ताओं पर कथित जातिवादी टिप्पणी के मामले में भी कार्रवाई की मांग।
वाड्रफनगर/ बलरामपुर…..
उत्तराखंड में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। मामले के विरोध में बलरामपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग की।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन में प्राथमिकी को अनुचित एवं राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही भाजपा के कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा कांग्रेस एवं दलित समाज के संबंध में कथित आपत्तिजनक और जातिवादी टिप्पणी किए जाने के आरोपों की भी जांच कर दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन में कहा गया है कि 31 अगस्त 2026 को राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज FIR की निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि जांच में प्राथमिकी में लगाए गए आरोप तथ्यहीन पाए जाते हैं तो FIR वापस ली जाए। वहीं, भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा दलित समाज के अपमान अथवा जातिवादी टिप्पणी किए जाने की पुष्टि होने पर संबंधित लोगों के खिलाफ भी कानून के तहत FIR दर्ज कर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कानून सभी नागरिकों के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए। किसी भी व्यक्ति के साथ राजनीतिक या जातिगत आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने राष्ट्रपति से पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की।
बताया गया कि विवाद उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा के बाद कथित तौर पर किए गए ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शुरू हुआ। राहुल गांधी ने इस घटना को जातिगत भेदभाव और छुआछूत से जोड़ते हुए कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद हल्द्वानी पुलिस ने शिकायत के आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
कांग्रेस ने FIR का विरोध करते हुए इसे राजनीतिक कार्रवाई बताया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि मामले में लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से जवाब दिया जाएगा। ज्ञापन पर जिला कांग्रेस कमेटी अनुसूचित जाति विभाग से जुड़े पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं के हस्ताक्षर दर्ज हैं।