मानसून में बढ़े सर्पदंश के मामले, समय पर उपचार से बची 158 लोगों की जान।
जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में उपलब्ध एंटी-स्नेक वेनम, स्वास्थ्य विभाग ने की सतर्क रहने की अपील।
बलरामपुर….
मानसून के दौरान जिले में सर्पदंश की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। जिले के सभी सामुदायिक एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। प्रशिक्षित चिकित्सकीय दल द्वारा सर्पदंश के मरीजों का तत्काल उपचार किया जा रहा है, जिससे सर्पदंश से होने वाली मृत्यु पर प्रभावी नियंत्रण बना हुआ है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय कुमार सिंह ने बताया कि जिले में अप्रैल माह में सर्पदंश के 25 मामले सामने आए थे, जो मई में बढ़कर 56 और जून में 158 हो गए। बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने उपचार व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया है।
उन्होंने बताया कि जून में दर्ज 158 मामलों में से 130 मरीजों का जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में सफलतापूर्वक उपचार किया गया, जबकि गंभीर स्थिति वाले 28 मरीजों को बेहतर इलाज के लिए उच्च स्वास्थ्य संस्थानों में रेफर किया गया। समय पर चिकित्सा सुविधा और एंटी-स्नेक वेनम उपलब्ध होने के कारण उपचार के दौरान किसी भी मरीज की मृत्यु दर्ज नहीं हुई।
स्वास्थ्य विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की रोकथाम एवं समय पर उपचार को लेकर लगातार जनजागरूकता अभियान चला रहा है। मितानिनों एवं अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से लोगों को अंधविश्वास से दूर रहने तथा सर्पदंश होने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार के बजाय तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने के लिए जागरूक किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वर्षाकाल में खेतों में कार्य करते समय पूरे पैर ढकने वाले जूते पहनें, रात में टॉर्च का उपयोग करें, जमीन पर सोने से बचें तथा सर्पदंश की स्थिति में बिना देर किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें। सीएमएचओ डॉ. विजय कुमार सिंह ने कहा कि सर्पदंश एक चिकित्सकीय आपात स्थिति है, लेकिन समय पर एंटी-स्नेक वेनम से उपचार मिलने पर मरीज की जान बचाई जा सकती है।