सेवा संकल्प अभियान में प्रशासन ने किया श्रमदान, घाघवा नाला में बनाया बोरी बंधान। सेंदुर नदी तट पर स्वच्छता अभियान के साथ हुआ पौधारोपण, कलेक्टर-एसपी-डीएफओ ने उठाई बोरियां।
बलरामपुर….
सेवा संकल्प अभियान के तहत ‘‘सेवा मेरा योगदान’’ की भावना को साकार करते हुए गुरुवार सुबह वन विभाग के तत्वावधान में सामूहिक श्रमदान कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिला प्रशासन एवं वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों ने घाघवा नाला और सेंदुर नदी तट पर श्रमदान कर जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत घाघवा नाला में बोरी बंधान निर्माण से हुई। करीब 150 से 200 बोरियों में मिट्टी भरकर बंधान तैयार किया गया। इससे बारिश के पानी को रोकने में मदद मिलेगी और भू-जल स्तर में सुधार के साथ आसपास के क्षेत्र में जल उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। जनप्रतिनिधियों के साथ कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी, पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर और वनमंडलाधिकारी आलोक वाजपेयी ने स्वयं बोरियां उठाकर श्रमदान किया।

इसके बाद सभी सेंदुर नदी तट पहुंचे, जहां ‘‘स्वच्छता ही सेवा’’ अभियान के तहत नदी तट एवं आसपास के क्षेत्र में सफाई की गई। वहीं ‘‘एक पेड़ मां के नाम’’ अभियान के अंतर्गत पौधारोपण कर हरित क्षेत्र के विस्तार का संदेश दिया गया। जनपद अध्यक्ष सुश्री सुमित्रा चेरवा, जिला पंचायत सीईओ आशुतोष चतुर्वेदी सहित जिला स्तरीय अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने भी श्रमदान, स्वच्छता और पौधारोपण में सहभागिता निभाई।
इस अवसर पर कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि ‘‘जल है तो कल है’’। वर्षा जल के संरक्षण के लिए छोटे-छोटे बंधान काफी प्रभावी साबित होते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपने आसपास के जलस्रोतों के संरक्षण में सहभागिता की अपील की।
एसपी श्री वैभव बैंकर ने कहा कि सेवा का भाव समाज को जोड़ता है। प्रशासन और नागरिक जब मिलकर श्रमदान करते हैं तो सकारात्मक बदलाव दिखाई देता है। वहीं डीएफओ श्री आलोक वाजपेयी ने नदी-नालों के संरक्षण और पौधारोपण को पर्यावरण सुरक्षा की बुनियाद बताते हुए लोगों से ‘‘एक पेड़ मां के नाम’’ अभियान से जुड़ने और लगाए गए पौधों की देखभाल करने की अपील की।
सेवा संकल्प अभियान के इस आयोजन के माध्यम से जल संरक्षण, स्वच्छता और पर्यावरण सुरक्षा को सामूहिक जिम्मेदारी बनाने का संदेश दिया गया। उपस्थित अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों ने प्रकृति संरक्षण के लिए नियमित रूप से ऐसे प्रयासों में सहभागिता का संकल्प लिया।