राष्ट्र सेवा के रंग में सजा विकसित भारत का संदेश, रंगोली में सजी वंदे भारत एक्सप्रेस, दिखी विकसित भारत की जीवंत झलक।
कन्या महाविद्यालय बलरामपुर में जिला स्तरीय रंगोली प्रतियोगिता, विद्यार्थियों ने प्राकृतिक सामग्रियों से उकेरी प्रगति पथ पर बढ़ते भारत की तस्वीर।
बलरामपुर…..
सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘राष्ट्र सेवा के रंग’ कार्यक्रम के तहत शासकीय कन्या महाविद्यालय बलरामपुर के प्रांगण में जिला स्तरीय रंगोली प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने विशाल रंगोली के माध्यम से वंदे भारत एक्सप्रेस का आकर्षक चित्रण करते हुए प्रगति पथ पर तेजी से आगे बढ़ते भारत की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।

विकसित भारत की परिकल्पना तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 25 वर्षों के सेवा, संकल्प और समर्पण पर केंद्रित विशाल रंगोली आयोजन का मुख्य आकर्षण रही। रंगोली निर्माण में स्थानीय प्राकृतिक उत्पादों, अनाज, फल-फूल और प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया गया। छत्तीसगढ़ को ‘धान का कटोरा’ के रूप में दर्शाने के लिए रंगे हुए धान का विशेष प्रयोग किया गया।
कार्यक्रम में शासकीय महाविद्यालय बलरामपुर, शासकीय कन्या महाविद्यालय बलरामपुर और नवीन महाविद्यालय रनहत के विद्यार्थियों के साथ युवाओं तथा स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने स्वयंसेवक के रूप में सहभागिता की।
*सभी विकासखंडों में गूंजा विकसित भारत का संदेश*
जिला मुख्यालय के साथ जिले के सभी विकासखंडों में भी रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। रामचन्द्रपुर विकासखंड में शासकीय लरंगसाय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रामानुजगंज परिसर में रामानुजगंज, सनावल और रामचन्द्रपुर महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने रंगोली के माध्यम से विकसित भारत की कल्पना को उकेरा।
वाड्रफनगर में शासकीय रानी दुर्गावती महाविद्यालय परिसर में वाड्रफनगर और रघुनाथनगर महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। वहीं राजपुर में शासकीय महाविद्यालय परिसर, कुसमी में कृषि मंडी परिसर तथा शंकरगढ़ में शंकरगढ़ स्टेडियम में स्थानीय महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने आकर्षक रंगोलियां बनाकर राष्ट्र सेवा और विकसित भारत का संदेश दिया।
आयोजन को सफल बनाने में जिले के उच्च शिक्षण संस्थानों के प्राचार्यों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभिन्न स्थानों पर जनप्रतिनिधियों ने पहुंचकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। युवाओं, स्वयंसेवकों और सामाजिक समूहों की सहभागिता से यह आयोजन जनभागीदारी के उत्सव में बदल गया।
प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार रंगोलियों ने परंपरा, प्रकृति और विकास के समन्वय का संदेश देते हुए यह संकल्प दोहराया कि प्रकृति और अपनी सांस्कृतिक विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ता भारत ही ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार कर सकता है।