नक्सल हिंसा ने छीना सहारा, शासन ने दिया सुरक्षित आशियाना।

स्पेशल प्रोजेक्ट से बदली नक्सल पीड़ित परिवार की तकदीर, कच्ची झोपड़ी की जगह मिला पक्का घर
बलरामपुर/ कुसमी…..
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के नक्सल प्रभावित क्षेत्र कुसमी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत चुनचुना के एक नक्सल पीड़ित परिवार की जिंदगी शासन की विशेष आवास योजना से बदल गई है। पुलिस मुखबिर होने के संदेह में नक्सलियों द्वारा मोहम्मद निमजनी की हत्या के बाद उनका परिवार वर्षों तक आर्थिक तंगी, असुरक्षा और अभावों के बीच जीवन गुजारने को मजबूर था। अब स्पेशल प्रोजेक्ट के तहत उन्हें पक्का आवास मिलने से परिवार को सुरक्षित आशियाना और नई उम्मीद मिली है।
मोहम्मद निमजनी की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी और छोटे-छोटे बच्चों पर जीवनयापन की पूरी जिम्मेदारी आ गई। जंगल के बीच बनी कच्ची झोपड़ी हर बरसात में टपकती थी, जिससे परिवार को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। बारिश के दौरान बच्चों को सुरक्षित स्थान पर बैठाकर रात गुजारनी पड़ती थी और घर का सामान भी भीग जाता था। ऐसे हालात में परिवार के सामने दो वक्त की रोटी जुटाना भी बड़ी चुनौती थी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित विशेष प्रोजेक्ट के तहत नक्सल पीड़ित एवं आत्मसमर्पित परिवारों को आवास उपलब्ध कराने की पहल के दौरान प्रशासन ने इस परिवार की स्थिति का आकलन किया और उन्हें पक्का आवास स्वीकृत किया। ग्राम पंचायत के सहयोग से निर्माण कार्य पूरा होने के बाद अब परिवार मजबूत दीवारों और पक्की छत वाले नए घर में रह रहा है।
परिवार के बच्चों ने बताया कि पिता की मृत्यु के बाद उन्हें कभी उम्मीद नहीं थी कि उनका अपना पक्का घर होगा। अब नए घर में रहने से उन्हें सुरक्षा का एहसास होता है और भविष्य को लेकर नई उम्मीद जगी है।
प्रशासन का कहना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्राथमिकता है। ऐसे परिवारों को आवास, मूलभूत सुविधाएं और सुरक्षा उपलब्ध कराकर उन्हें सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास किया जा रहा है। चुनचुना गांव का यह परिवार अब इसी बदलाव का उदाहरण बन गया है, जहां कभी भय और अभाव का माहौल था, वहीं आज पक्के घर के साथ बेहतर भविष्य की उम्मीद दिखाई दे रही है।