परेड और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन, देशभक्ति के रंग में रंगा स्वतंत्रता दिवस समारोह।
बलरामपुर…
स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में जवानों एवं विद्यार्थियों की आकर्षक परेड और स्कूली बच्चों की देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण का केन्द्र रहीं। परेड के दौरान देशभक्ति की धुनों पर जवानों और विद्यार्थियों ने कदम से कदम मिलाते हुए मार्चपास्ट किया तथा मंच के सामने पहुंचकर राष्ट्रीय ध्वज और मुख्य अतिथि सरगुजा सांसद चिंतामणि महाराज को पूरे जोश एवं उत्साह के साथ सलामी दी।

परेड कमांडर रक्षित निरीक्षक विमलेश कुमार देवांगन एवं परेड टू आईसी सूबेदार, रक्षित केंद्र ज्योति साहू के नेतृत्व में परेड का शानदार प्रदर्शन किया गया। सीनियर वर्ग में 12वीं बटालियन रामानुजगंज, 10वीं वाहिनी छत्तीसगढ़ बल, जिला पुलिस बल पुरुष एवं महिला, नगर सेना, महिला नगर सेना और वन विभाग की टुकड़ियों ने भाग लिया। वहीं जूनियर वर्ग में एनसीसी शासकीय महाविद्यालय बलरामपुर, शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सरस्वती शिशु मंदिर, संत जोसेफ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय तथा सेजस हिंदी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की टुकड़ियों ने मार्चपास्ट किया। इसके बाद मुख्य अतिथि सांसद चिंतामणि महाराज ने सभी परेड कमांडरों से परिचय प्राप्त किया।
*एक पेड़ मां के नाम’ से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश*
समारोह के दूसरे चरण में विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने देशप्रेम, भाईचारा, एकता और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति पर आधारित मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। पहाड़ी कोरवा आवासीय विद्यालय भेलवाडीह के विद्यार्थियों ने ‘जय-जयकार गूंजे आजादी’ वीर गाथा प्रस्तुत की। न्यू ईरा पब्लिक स्कूल रामानुजगंज ने ‘बलरामपुर एक प्राकृतिक धरोहर’ के माध्यम से जिले की प्राकृतिक सुंदरता का संदेश दिया, जबकि एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय भेलवाडीह ने ‘जय जवान, जय किसान’ की प्रस्तुति दी।

शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बलरामपुर की छात्राओं ने छत्तीसगढ़ी नृत्य ‘आजादी का तिहार’ प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया। संत जोसेफ मिशन स्कूल के विद्यार्थियों ने योग को दैनिक जीवन में शामिल करने तथा स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन के संदेश के साथ जुंबा पीटी का शानदार प्रदर्शन किया।
‘एक पेड़ मां के नाम’ पर आधारित प्रस्तुति में बच्चों ने पर्यावरण संरक्षण के साथ मातृ सम्मान का संदेश दिया। उन्होंने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण का आह्वान किया। वहीं छत्तीसगढ़ के पारंपरिक तीज-त्योहारों और लोक संस्कृति पर आधारित गीतों पर बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा एवं आभूषणों के साथ आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया। लोकगीतों की सुरमयी धुन और मनमोहक प्रस्तुतियों ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और दर्शकों ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
