शासकीय अनुदान से साकार हुआ मछली पालन का सपना।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना बनी दुर्गावती का आर्थिक संबल, बायोफ्लॉक तालाब से 5 से 6 क्विंटल उत्पादन की उम्मीद।
बलरामपुर…
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने और आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए शासन द्वारा संचालित योजनाएं अब लोगों के सपनों को हकीकत में बदलने का माध्यम बन रही हैं। बलरामपुर विकासखंड के ग्राम करीचलगली निवासी श्रीमती दुर्गावती सिरोटिया इसका उदाहरण हैं। आर्थिक तंगी के कारण वर्षों से अधूरा पड़ा उनका मछली पालन का सपना अब प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के सहयोग से साकार हो गया है।
दुर्गावती को शुरू से ही मछली पालन में रुचि थी। वह स्वयं का व्यवसाय शुरू कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहती थीं, लेकिन पर्याप्त पूंजी नहीं होने के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा था। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिलने वाले अनुदान की जानकारी मिली। योजना से जुड़कर उन्होंने वर्ष 2025-26 में बायोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया।
मत्स्य विभाग के माध्यम से उन्हें योजना के तहत 60 प्रतिशत अनुदान प्राप्त हुआ, जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि उन्होंने स्वयं वहन की। विभाग द्वारा तालाब निर्माण से लेकर मछली पालन तक आवश्यक तकनीकी सहयोग और मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।
तालाब तैयार होने के बाद दुर्गावती अब मछली उत्पादन शुरू करने की तैयारी में जुटी हैं। बायोफ्लॉक तालाब से उन्हें करीब 5 से 6 क्विंटल मछली उत्पादन की उम्मीद है। इससे लगभग एक लाख रुपये तक की आय होने का अनुमान है। बेहतर परिणाम मिलने पर वह भविष्य में मछली पालन के व्यवसाय का विस्तार करने की भी योजना बना रही हैं।
दुर्गावती का कहना है कि आर्थिक परेशानी के कारण जिस व्यवसाय को वह वर्षों से शुरू नहीं कर पा रही थीं, वह शासन की योजना और विभागीय सहयोग से संभव हो सका। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिलने से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को स्वरोजगार की नई राह मिल रही है।
करीचलगली में तैयार हुआ यह बायोफ्लॉक तालाब दुर्गावती के लिए सिर्फ मछली उत्पादन का साधन नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूती, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की उम्मीद बनकर सामने आया है।