बॉक्साइट खदान बंद, सैकड़ों मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट।q
खेती की जमीन उत्खनन के लिए देने के बाद रोजगार भी बंद, कलेक्टर-विधायक और सांसद से लगाई गुहार।
विवेक कश्यप- कुसमी/ बलरामपुर…..
बलरामपुर जिले के विकासखंड कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत सेरंगदाग में संचालित बालाजी मार्बल एवं टाइल्स की बॉक्साइट खदान 14 अगस्त से बंद है। खनिज विभाग द्वारा कंपनी में सामने आई विभिन्न कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही माइनिंग प्लान के अनुरूप कार्य करने को कहा गया है। इसके बाद से खदान में उत्खनन कार्य ठप पड़ा है। खदान बंद होने का सीधा असर यहां कार्यरत सैकड़ों मजदूरों की आजीविका पर पड़ा है।
*खेती की जमीन दी, अब रोजगार भी बंद*
खदान में काम करने वाले मजदूरों का कहना है कि उन्होंने अपनी खेती योग्य जमीन बॉक्साइट उत्खनन के लिए दी थी। उनका उद्देश्य था कि कंपनी में रोजगार मिलने से परिवार का भरण-पोषण हो सके। लेकिन खदान बंद होने के बाद उनका रोजगार भी बंद हो गया है। मजदूरों के अनुसार खेती की जमीन देने के बाद उनके पास आय का कोई स्थायी वैकल्पिक साधन नहीं बचा है, जिससे परिवार चलाने में परेशानी हो रही है।
*आर्थिक संकट से जूझ रहे मजदूर*
मजदूरों का कहना है कि लंबे समय से खदान बंद रहने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार खराब हो रही है। परिवार के दैनिक खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। मजदूरों ने प्रशासन से उनकी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान की मांग की है।
*कंपनी प्रबंधन से संपर्क का प्रयास, फोन नहीं उठाने का आरोप*
प्रभावित मजदूरों के मुताबिक कंपनी के मैनेजर और एमडी ऋषभ मित्तल से संपर्क करने का कई बार प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया गया। मजदूरों का कहना है कि प्रबंधन की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने के कारण उनके बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
*कलेक्टर, विधायक और सांसद से हस्तक्षेप की मांग*
मजदूरों ने बलरामपुर कलेक्टर संजय चंदन त्रिपाठी, क्षेत्रीय विधायक उद्धेश्वरी पैकरा और सांसद चिंतामणि महाराज से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि खनिज विभाग द्वारा कंपनी को जिन कमियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं, उन्हें जल्द पूरा कराया जाए, ताकि नियमानुसार खदान का संचालन दोबारा शुरू हो सके और मजदूरों को रोजगार मिल सके।
*बोले मजदूर जमीन भी गई, रोजगार भी छिना*
प्रभावित मजदूरों का कहना है कि उन्होंने रोजगार की उम्मीद में अपनी जमीन उत्खनन के लिए दी थी। अब खदान बंद होने से उनके सामने दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। मजदूरों ने प्रशासन से मांग की है कि उनकी आजीविका को ध्यान में रखते हुए मामले में तत्काल पहल की जाए और खदान का संचालन नियमों के अनुरूप जल्द शुरू कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए।
फिलहाल खदान बंद होने से सैकड़ों मजदूरों के सामने आर्थिक संकट बना हुआ है और वे प्रशासन से शीघ्र राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।